क्या आपने कभी सोचा है कि आपके हाथ में मौजूद स्मार्टफोन, लैपटॉप की तेज़ी, या फिर आपकी इलेक्ट्रिक गाड़ी की बेमिसाल रफ्तार के पीछे असली जादू क्या है? जी हाँ, यह सब कमाल है नन्हे से सेमीकंडक्टर चिप्स का, और इन चिप्स को बनाने वाली सामग्रियाँ ही हमारी आधुनिक दुनिया की असली नींव हैं!
जब मैं इस क्षेत्र के बारे में पढ़ता हूँ, तो नई-नई खोजें और तकनीकी प्रगति देखकर सचमुच दंग रह जाता हूँ। आजकल तो 2D मटेरियल्स, जैसे ग्राफीन, और गैलियम नाइट्राइड जैसी उन्नत सामग्रियाँ चर्चा में हैं, जो हमारे कल्पना से भी छोटे, तेज़ और ऊर्जा-कुशल चिप्स बनाने में मदद कर रही हैं।भारत भी इस वैश्विक दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है, ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना के साथ हम सेमीकंडक्टर निर्माण में अपनी जगह बना रहे हैं और ‘मेड इन इंडिया’ चिप्स का सपना साकार हो रहा है। सोचिए, ये छोटी सी सामग्रियां कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G और आने वाली हर नई तकनीक को आकार दे रही हैं!
यह सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि हमारे भविष्य की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा का भी अहम हिस्सा है। इस बदलाव को समझना वाकई में बहुत रोमांचक है, और मेरा अनुभव कहता है कि इसकी हर बारीकी जानना आपके लिए बेहद फायदेमंद होगा।चलिए, बिना किसी देरी के, इस अविश्वसनीय दुनिया में गहराई से उतरते हैं और सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाली इन खास सामग्रियों के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करते हैं।
सेमीकंडक्टर की दुनिया, दोस्तों, सच में कमाल की है! आजकल हमारे फोन से लेकर बड़ी-बड़ी मशीनों तक, हर जगह इनकी धाक है। मुझे याद है, पहले जब मैं इलेक्ट्रॉनिक्स के बारे में पढ़ता था, तो सोचता था कि ये छोटे-छोटे कंपोनेंट्स आखिर बनते कैसे होंगे। अब जब इस फील्ड में इतनी तरक्की हो रही है, खासकर भारत में, तो दिल को बड़ी खुशी होती है। पहले जहां हम सिर्फ बाहर से चिप्स मंगवाते थे, अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ की वजह से हम खुद इनका निर्माण कर रहे हैं। सोचिए, अपने देश में बनी चिप्स से हमारे गैजेट्स चलेंगे, ये कितनी गर्व की बात है!
मुझे लगता है कि ये सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि हमारी पहचान और भविष्य का आधार भी बन रही है। इस यात्रा में सिलिकॉन, गैलियम नाइट्राइड और 2D मटेरियल्स जैसे हीरो हैं, जो हमारी डिजिटल दुनिया को नई उड़ान दे रहे हैं।
सिलिकॉन: सेमीकंडक्टर का सच्चा सिपाही

सेमीकंडक्टर की दुनिया में सिलिकॉन (Silicon) का नाम सबसे पहले आता है, और क्यों न आए? यह तो समझो इस पूरे खेल का सबसे पुराना और विश्वसनीय खिलाड़ी है! हम सभी जानते हैं कि हमारे आस-पास मौजूद लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, चाहे वो हमारा स्मार्टफोन हो, लैपटॉप हो, या फिर स्मार्ट टीवी, इन सबके दिल में सिलिकॉन से बनी चिप्स ही धड़कती हैं। मुझे तो कभी-कभी लगता है कि अगर सिलिकॉन न होता, तो आज की हमारी ये तेज़-तर्रार डिजिटल दुनिया शायद इतनी आगे बढ़ ही नहीं पाती। इसकी चालकता इतनी कमाल की है कि इसे कंट्रोल करना आसान होता है, और यही वजह है कि यह इंटीग्रेटेड सर्किट (ICs) बनाने के लिए सबसे पसंदीदा सामग्री है। सिलिकॉन पृथ्वी पर ऑक्सीजन के बाद दूसरा सबसे प्रचुर तत्व है, जो हमें रेत और चट्टानों में आसानी से मिल जाता है। सोचिए, ये साधारण सी रेत कैसे इतनी उन्नत टेक्नोलॉजी की नींव बन जाती है! इसकी खासियत यह भी है कि यह कम लागत में उपलब्ध है और निर्माण में भी आसान है, साथ ही यह तापमान की एक विस्तृत श्रृंखला में काम कर सकता है। यही कारण है कि यह आज भी सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का बेताज बादशाह बना हुआ है।
शुद्धता और डोपिंग का जादू
सिलिकॉन की यात्रा सिर्फ खनन से शुरू होकर सीधे चिप बनने तक नहीं जाती, बल्कि इसके पीछे एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होती है। पहले तो इसे रेत से निकालकर अत्यधिक शुद्ध किया जाता है, इतना शुद्ध कि इसमें किसी भी प्रकार की अशुद्धि न रहे। मेरे अनुभव से, इस शुद्धिकरण प्रक्रिया में थोड़ी भी चूक हुई, तो चिप की परफॉर्मेंस पर सीधा असर पड़ सकता है। फिर बारी आती है डोपिंग की, जो सिलिकॉन को उसका असली ‘सुपरपावर’ देती है। डोपिंग में शुद्ध सिलिकॉन में थोड़ी मात्रा में अशुद्धियाँ (जैसे फास्फोरस या बोरॉन) मिलाई जाती हैं, जिससे इसकी विद्युत चालकता को नियंत्रित किया जा सके। यह डोपिंग ही तय करती है कि चिप n-टाइप होगी या p-टाइप, और इन्हीं के मेल से P-N जंक्शन बनते हैं, जो ट्रांजिस्टर और डायोड जैसे उपकरणों का आधार हैं। इस प्रक्रिया को समझना ऐसा है जैसे किसी कुशल कारीगर को मिट्टी से अद्भुत कलाकृति बनाते देखना। डोपिंग की बदौलत ही सेमीकंडक्टर के गुणधर्मों को बदला जा सकता है, जिससे वे स्विचिंग और एम्प्लीफिकेशन जैसे काम बखूबी कर पाते हैं।
तकनीकी क्रांति में सिलिकॉन का योगदान
आजकल हम जो भी तकनीकी चमत्कार देखते हैं – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G नेटवर्क, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) – इन सब में सिलिकॉन का बहुत बड़ा योगदान है। इसने न केवल कंप्यूटर और मोबाइल फोन को संभव बनाया, बल्कि सोलर पैनल और LED (light-emitting diode) जैसे ऊर्जा-कुशल उपकरणों में भी इसका व्यापक उपयोग होता है। कल्पना कीजिए, अगर सिलिकॉन नहीं होता, तो हमारी दुनिया कितनी अलग होती! मुझे तो इस बात से खुशी होती है कि भारत भी अब इस सिलिकॉन आधारित चिप निर्माण में अपनी जगह बना रहा है, जिससे हमारी तकनीकी आत्मनिर्भरता का सपना साकार हो रहा है। यह सिर्फ एक सामग्री नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गई है, और इसकी भूमिका भविष्य में और भी बढ़ने वाली है।
नई पीढ़ी की सामग्रियों का उदय: गति और दक्षता का नया मानदंड
जब भी मैं सेमीकंडक्टर की दुनिया में हो रहे नए-नए आविष्कारों के बारे में सुनता हूँ, तो मुझे लगता है कि ये टेक्नोलॉजी वाकई हमें भविष्य में खींच ले जा रही है। सिलिकॉन तो हमेशा से हमारा ‘गो-टू’ मटेरियल रहा है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसी कमाल की सामग्रियाँ खोज निकाली हैं, जो चिप्स को और भी तेज़, छोटे और ऊर्जा-कुशल बना रही हैं। गैलियम नाइट्राइड (GaN) और सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) जैसी “वाइड बैंडगैप” (Wide Bandgap) सामग्रियाँ इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। मेरा मानना है कि ये सामग्रियाँ सिर्फ मौजूदा गैजेट्स को बेहतर नहीं बना रही हैं, बल्कि पूरी तरह से नई तरह की टेक्नोलॉजी का रास्ता खोल रही हैं, जिसके बारे में हमने शायद कभी सोचा भी नहीं था। ये इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर 5G बेस स्टेशनों तक, हर जगह गेम चेंजर साबित हो रही हैं।
गैलियम नाइट्राइड (GaN): अगली पीढ़ी की शक्ति
गैलियम नाइट्राइड, जिसे GaN भी कहते हैं, आजकल पावर इलेक्ट्रॉनिक्स का नया सितारा है। मुझे याद है, कुछ साल पहले तक GaN सिर्फ रिसर्च लैब तक ही सीमित था, लेकिन अब यह तेजी से हमारे रोजमर्रा के उपकरणों में अपनी जगह बना रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उच्च वोल्टेज और उच्च तापमान पर भी बहुत कुशलता से काम कर सकता है। इससे हमारे चार्जर छोटे हो जाते हैं, इलेक्ट्रिक वाहनों की परफॉर्मेंस बढ़ जाती है, और 5G नेटवर्क भी पहले से कहीं ज्यादा तेज और कुशल हो जाते हैं। मैंने खुद देखा है कि GaN-आधारित चार्जर कितने कॉम्पैक्ट और दमदार होते हैं! यह सिलिकॉन की तुलना में बहुत कम ऊर्जा बर्बाद करता है, जिससे गर्मी भी कम पैदा होती है। यह गुण इसे डेटा सेंटरों और पावर सप्लाई जैसी जगहों के लिए एकदम सही बनाता है, जहाँ ऊर्जा दक्षता बेहद ज़रूरी होती है। भविष्य में, जैसे-जैसे हम और अधिक ऊर्जा-कुशल और छोटे उपकरणों की ओर बढ़ेंगे, GaN की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी।
सिलिकॉन कार्बाइड (SiC): कठोरता और सहनशीलता का प्रतीक
सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) एक और अद्भुत सामग्री है, जो अपनी असाधारण कठोरता और उच्च तापमान सहने की क्षमता के लिए जानी जाती है। मुझे लगता है कि SiC उन जगहों के लिए बिल्कुल परफेक्ट है जहाँ चरम स्थितियाँ होती हैं, जैसे कि इलेक्ट्रिक वाहनों के पावर इन्वर्टर या औद्योगिक मोटर ड्राइव। इसकी उच्च थर्मल कंडक्टिविटी का मतलब है कि यह बहुत ज्यादा गर्मी को भी आसानी से संभाल सकता है, जिससे डिवाइस ओवरहीट नहीं होते। कल्पना कीजिए, एक इलेक्ट्रिक गाड़ी जो तेज रफ्तार से दौड़ रही है, उसके अंदर की चिप्स को कितनी गर्मी का सामना करना पड़ता होगा! ऐसे में SiC ही उन्हें सुरक्षित और कुशल बनाए रखता है। भारत में भी अब पारंपरिक सिलिकॉन आधारित चिप्स से सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) चिप्स की ओर बढ़ने की बात हो रही है, क्योंकि SiC चिप्स ज्यादा मजबूत हैं और 2400°C तक के तापमान और उच्च वोल्टेज सह सकते हैं। यह न केवल उपकरणों की विश्वसनीयता बढ़ाता है, बल्कि उनकी लंबी उम्र भी सुनिश्चित करता है।
2D मटेरियल्स: नैनो-दुनिया का भविष्य
मुझे आज भी याद है जब मैंने पहली बार ग्राफीन के बारे में पढ़ा था, तो यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की चीज़ लगती थी! लेकिन अब 2D मटेरियल्स, जैसे ग्राफीन (Graphene) और टंगस्टन डाइसल्फाइड (WS2), सेमीकंडक्टर उद्योग में एक नई क्रांति ला रहे हैं। ये इतनी पतली सामग्रियाँ हैं कि आप इन्हें लगभग अदृश्य मान सकते हैं – सिर्फ एक परमाणु जितनी मोटी! सोचिए, इतने छोटे स्केल पर काम करने से चिप्स कितनी छोटी और तेज़ बन सकती हैं। मेरा मानना है कि ये सामग्रियाँ हमारे भविष्य के इलेक्ट्रॉनिक्स, खास करके लचीले और पहनने योग्य गैजेट्स को पूरी तरह से बदल देंगी।
ग्राफीन की बेजोड़ क्षमता
ग्राफीन को “सुपर-मटेरियल” कहना गलत नहीं होगा। यह न सिर्फ बेहद पतला और हल्का है, बल्कि इसकी विद्युत चालकता और मजबूती भी बेमिसाल है। मुझे लगता है कि ग्राफीन से बनी चिप्स इतनी तेज़ होंगी कि आज के सुपरकंप्यूटर भी उनके सामने फीके पड़ जाएंगे। इसकी लचीलापन इसे पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक्स (wearable electronics) और फोल्डेबल डिस्प्ले के लिए एकदम सही बनाता है, जो आजकल बहुत ट्रेंड में हैं। कल्पना कीजिए, एक स्मार्टफोन जो आपकी कलाई पर लिपट जाए या एक स्वास्थ्य मॉनिटर जो आपकी त्वचा पर चिपक जाए और वास्तविक समय में डेटा दे। ग्राफीन में यह सब संभव करने की क्षमता है। हालाँकि, इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं, जैसे कि समय के साथ इसका ऑक्सीकरण और क्षरण (degradation) होना, जिससे उपकरण की दक्षता कम हो सकती है। वैज्ञानिक अभी भी इन चुनौतियों पर काम कर रहे हैं, ताकि ग्राफीन की पूरी क्षमता का उपयोग किया जा सके।
टंगस्टन डाइसल्फाइड (WS2) और लचीले इलेक्ट्रॉनिक्स
ग्राफीन के साथ-साथ टंगस्टन डाइसल्फाइड (WS2) भी 2D मटेरियल्स की दुनिया का एक और होनहार सितारा है। हाल ही में, IIT मंडी के शोधकर्ताओं ने WS2-PDMS मिश्रित निर्माण जैसी तकनीकों का विकास किया है, जो टिकाऊ और लचीले इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने में मदद कर रही हैं। यह शोध पहनने योग्य स्वास्थ्य निगरानी सेंसर, लचीले डिस्प्ले, स्मार्टफोन, सौर सेल और क्वांटम प्रौद्योगिकियों के निर्माण में सहायक होगा। मुझे लगता है कि इन 2D सामग्रियों में एक अदृश्य शक्ति है, जो हमारे दैनिक जीवन को और भी सुविधाजनक और स्मार्ट बना सकती है। इनकी परमाणु-समान रूप से पतली परतें बिना ऑप्टिकल या विद्युत गुणों को प्रभावित किए सुरक्षित रहती हैं, जिससे अगली पीढ़ी के सेंसर, डिस्प्ले और स्वास्थ्य-निगरानी के लिए एक मापनीय, दीर्घकालिक प्लेटफ़ॉर्म तैयार हो रहा है।
सेमीकंडक्टर निर्माण के चरण: रेत से चिप तक की यात्रा
कभी आपने सोचा है कि आपके हाथ में मौजूद एक नन्ही सी चिप कैसे बनती है? मुझे तो ये हमेशा से एक जादू जैसा लगता रहा है! रेत के एक छोटे से कण से लेकर एक जटिल माइक्रोप्रोसेसर बनने तक की यात्रा में कई रोमांचक और जटिल चरण होते हैं। यह सिर्फ इंजीनियरिंग नहीं, बल्कि एक कला है, जहाँ हर कदम पर सटीकता और विशेषज्ञता की ज़रूरत होती है। जब मैं इन प्रक्रियाओं के बारे में पढ़ता हूँ, तो मुझे लगता है कि ये वाकई मानव ingenuity का कमाल है। इस पूरी प्रक्रिया को ‘फैब्रिकेशन’ कहते हैं, और भारत भी अब इसमें अपनी पहचान बना रहा है।
कच्चे माल से वेफर तक का सफर
इस सफर की शुरुआत होती है सिलिका (SiO2) की रेत से, जो प्राकृतिक रूप से हमारे आस-पास मौजूद है। भारत के कई राज्यों, जैसे झारखंड, राजस्थान और गुजरात में उच्च गुणवत्ता वाली सिलिका रेत उपलब्ध है। इस रेत को पहले शुद्ध किया जाता है, ताकि इसमें कोई अशुद्धि न रहे, क्योंकि चिप की परफॉर्मेंस के लिए शुद्धता बहुत ज़रूरी है। फिर इस शुद्ध सिलिकॉन को पिघलाकर एक क्रिस्टल फॉर्म में बदला जाता है, जिसे ‘इनगॉट’ कहते हैं। यह प्रक्रिया इतनी सटीक होती है कि इसमें जरा सी भी गलती पूरे बैच को खराब कर सकती है। इसके बाद, इन लंबे, बेलनाकार इनगॉट्स को हीरे के ब्लेड से पतली-पतली स्लाइस में काटा जाता है, जिन्हें ‘वेफर’ कहते हैं। ये वेफर ही आगे चलकर माइक्रोचिप्स में बदलते हैं। मुझे यह जानकर बहुत खुशी होती है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और वेदांता-फॉक्सकॉन जैसी भारतीय कंपनियाँ अब इस प्रक्रिया को घरेलू स्तर पर शुरू करने की तैयारी में हैं।
फोटोलिथोग्राफी: डिज़ाइन की प्रिंटिंग
वेफर्स तैयार होने के बाद, सबसे जटिल और रचनात्मक चरण आता है: ‘फोटोलिथोग्राफी’। इसमें वेफर पर एक लाइट-सेंसिटिव लेयर (Photoresist) लगाई जाती है, और फिर उस पर चिप का डिज़ाइन अल्ट्रावॉयलेट लाइट का उपयोग करके प्रिंट किया जाता है। यह प्रक्रिया इतनी सूक्ष्म होती है कि इसमें नैनोमीटर स्केल पर काम किया जाता है। मेरे हिसाब से, यह किसी प्रिंटर से ज़्यादा, किसी कलाकार की बारीकी का काम है, जहाँ हर सर्किट लाइन को परफेक्ट बनाना होता है। इस प्रक्रिया में कई लेयर्स को एक के ऊपर एक प्रिंट किया जाता है, जिससे अरबों ट्रांजिस्टर वाला एक जटिल सर्किट बनता है। अंत में, चिप्स को वेफर से काटकर अलग किया जाता है और उनकी टेस्टिंग की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया को स्वच्छ कमरों (Clean Rooms) में किया जाता है, जहाँ धूल का एक कण भी नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह चिप को खराब कर सकता है।
भारत का सेमीकंडक्टर सपना: आत्मनिर्भरता की ओर कदम
यह देखकर सच में दिल खुश हो जाता है कि भारत अब सेमीकंडक्टर की दुनिया में सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक मज़बूत खिलाड़ी बनने की राह पर है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों ने इस सपने को पंख दिए हैं। मुझे याद है, कुछ साल पहले तक हम अपनी ज़रूरतों के लिए पूरी तरह से दूसरे देशों पर निर्भर थे, लेकिन अब स्थिति तेज़ी से बदल रही है। यह सिर्फ आर्थिक विकास का मामला नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी संप्रभुता का भी अहम हिस्सा है। जिस तरह से सरकार और निजी कंपनियाँ मिलकर काम कर रही हैं, मुझे पूरा यकीन है कि भारत जल्द ही ग्लोबल सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक अहम भूमिका निभाएगा।
सरकारी पहल और प्रोत्साहन
भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 2021 में शुरू किया गया ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM)’ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसके तहत 76,000 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय किया गया है। इसके अलावा, ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम’ और ‘डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना’ जैसी पहलें भी हैं, जो निवेश आकर्षित कर रही हैं और घरेलू निर्माण को प्रोत्साहन दे रही हैं। मुझे लगता है कि ये पहलें न केवल कंपनियों को भारत में उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं, बल्कि नए स्टार्टअप्स को भी चिप डिज़ाइन और फैब्रिकेशन में उतरने का मौका दे रही हैं। हाल ही में गुजरात में टाटा समूह और ताइवान की पावरचिप के नेतृत्व वाले 11 बिलियन डॉलर के चिप निर्माण संयंत्र को मंजूरी मिलना एक बड़ा मील का पत्थर है।
चुनौतियाँ और आगे की राह
हालांकि, सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भारत की राह आसान नहीं है। मुझे लगता है कि हमें अभी भी कुछ बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कि बुनियादी ढांचे की कमी, कुशल प्रतिभाओं की कमी और एक मज़बूत आपूर्ति श्रृंखला बनाना। चिप निर्माण के लिए अत्यधिक शुद्ध पानी, निर्बाध बिजली और एक विशाल कौशल-युक्त कार्यबल की आवश्यकता होती है। लेकिन जिस तरह से सरकार ‘स्किल इंडिया’ और ‘चिप्स टू स्टार्टअप (C2S)’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से इंजीनियरों और तकनीकी प्रतिभाओं को प्रशिक्षित कर रही है, मुझे उम्मीद है कि हम इन चुनौतियों से पार पा लेंगे। 2030 तक भारत का सेमीकंडक्टर बाज़ार 100-120 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, और यह तभी संभव होगा जब हम इन चुनौतियों का सामना साहस और नवाचार के साथ करेंगे।
सेमीकंडक्टर के अनुप्रयोग: हमारी दुनिया को बदलने वाले चिप्स

आजकल, मुझे लगता है कि सेमीकंडक्टर चिप्स हमारी ज़िंदगी का ऐसा हिस्सा बन गए हैं जिनके बिना हम एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकते। सोचिए, सुबह उठकर जो अलार्म हमें जगाता है, जिस फोन पर हम मैसेज चेक करते हैं, या जिस गाड़ी से हम काम पर जाते हैं, हर जगह ये छोटे-छोटे जादूगर छिपे हुए हैं। मुझे तो कभी-कभी हैरानी होती है कि एक छोटी सी चिप कैसे इतनी सारी गणनाएँ कर लेती है और हमारी दुनिया को इतना स्मार्ट बना देती है। यह सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी का एक अनिवार्य हिस्सा है, और इसके बिना आधुनिकता की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
स्मार्टफोन और कंप्यूटिंग में महारत
हमारे स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट – ये सभी सेमीकंडक्टर चिप्स के बिना कुछ भी नहीं हैं। माइक्रोप्रोसेसर, मेमोरी चिप्स और ग्राफिक्स प्रोसेसर, ये सब सेमीकंडक्टर से ही बनते हैं। मुझे याद है, जब मैं पहली बार एक स्मार्टफोन का उपयोग कर रहा था, तो उसकी गति और कार्यक्षमता से दंग रह गया था। यह सब इन छोटी चिप्स का कमाल है जो डेटा को इतनी तेज़ी से प्रोसेस करती हैं और हमें एक सहज अनुभव देती हैं। 5G टेक्नोलॉजी के आने से तो इनकी ज़रूरत और बढ़ गई है, क्योंकि अब हमें और तेज़ डेटा ट्रांसफर और कनेक्टिविटी चाहिए।
ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति
आजकल, ऑटोमोबाइल उद्योग भी सेमीकंडक्टर चिप्स पर बहुत निर्भर है, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) में। बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम से लेकर एडवांस्ड ड्राइवर-असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) तक, हर जगह चिप्स का इस्तेमाल होता है। मैंने खुद देखा है कि कैसे एक इलेक्ट्रिक कार इतनी तेज़ी से चल पाती है और इतनी सारी सुविधाओं से लैस होती है, ये सब इन चिप्स की बदौलत ही है। मुझे लगता है कि जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ेगी, सेमीकंडक्टर की ज़रूरत भी उसी रफ्तार से बढ़ेगी। यह सिर्फ गाड़ियों को स्मार्ट नहीं बना रहा, बल्कि उन्हें सुरक्षित और ऊर्जा-कुशल भी बना रहा है।
उद्योग और IoT में बढ़ती भूमिका
उद्योग 4.0 (Industry 4.0) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के उदय के साथ, सेमीकंडक्टर चिप्स की भूमिका औद्योगिक स्वचालन और स्मार्ट फैक्ट्रियों में भी बढ़ रही है। रोबोटिक्स, मशीन टूल्स और मेडिकल उपकरण, ये सभी जटिल गणनाओं और नियंत्रण के लिए चिप्स पर निर्भर करते हैं। मुझे लगता है कि IoT डिवाइस, जो एक-दूसरे से कनेक्ट होकर डेटा साझा करते हैं, सेमीकंडक्टर के बिना संभव ही नहीं हैं। यह सिर्फ मशीनों को स्मार्ट नहीं बना रहा, बल्कि पूरे औद्योगिक परिदृश्य को बदल रहा है, जिससे उत्पादन और दक्षता में भारी सुधार हो रहा है।
भविष्य की ओर: सेमीकंडक्टर की अगली लहर
मुझे लगता है कि सेमीकंडक्टर की दुनिया कभी रुकती नहीं, यह हमेशा आगे बढ़ती रहती है। आज हम जिस टेक्नोलॉजी को अत्याधुनिक मान रहे हैं, कल वह पुरानी हो जाएगी। यही इस क्षेत्र की सबसे रोमांचक बात है! जैसे-जैसे हमारी डिजिटल दुनिया और अधिक जटिल होती जा रही है, वैसे-वैसे हमें और भी उन्नत सेमीकंडक्टर समाधानों की ज़रूरत पड़ रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और 6G जैसी उभरती तकनीकें सेमीकंडक्टर के लिए नए क्षितिज खोल रही हैं। मेरा मानना है कि अगले कुछ सालों में हम ऐसी-ऐसी चिप्स देखेंगे जिनकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) को चलाने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए सेमीकंडक्टर चिप्स की आवश्यकता होती है। ये चिप्स, जिन्हें AI एक्सेलेरेटर या न्यूरोमॉर्फिक चिप्स कहते हैं, बहुत बड़ी मात्रा में डेटा को तेज़ी से प्रोसेस कर सकते हैं। मुझे लगता है कि AI के बिना हमारा भविष्य अधूरा है, और इन चिप्स के बिना AI भी संभव नहीं है। मैंने देखा है कि कैसे AI अब हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन रहा है, चाहे वह स्मार्टफोन में फेस रिकॉग्निशन हो या सेल्फ-ड्राइविंग कारें। ये सब इन खास चिप्स की बदौलत ही संभव हो पा रहा है। AI के लिए ऐसी चिप्स चाहिए जो कम बिजली पर ज़्यादा काम कर सकें, और यहीं पर नई सामग्री और डिज़ाइन की ज़रूरत पड़ती है।
क्वांटम कंप्यूटिंग का उदय
क्वांटम कंप्यूटिंग अभी भी अपने शुरुआती चरण में है, लेकिन इसमें इतनी क्षमता है कि यह दुनिया को पूरी तरह से बदल सकती है। क्वांटम कंप्यूटर को चलाने के लिए ‘क्यूबिट्स’ (qubits) की ज़रूरत होती है, जिन्हें बनाने के लिए विशेष प्रकार के सेमीकंडक्टर मटेरियल्स की खोज की जा रही है। मुझे लगता है कि क्वांटम चिप्स बनाना सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियों में से एक है, लेकिन अगर हम इसमें सफल हो गए, तो यह चिकित्सा, सामग्री विज्ञान और क्रिप्टोग्राफी जैसे क्षेत्रों में क्रांति ला देगा। यह एक ऐसी चुनौती है जो वैज्ञानिकों को उत्साहित करती है और मुझे भी इस क्षेत्र में हो रही प्रगति को देखकर हमेशा हैरानी होती है।
6G और कनेक्टिविटी का भविष्य
जब 5G अभी पूरी तरह से फैला भी नहीं है, तब से ही 6G की बात शुरू हो गई है! 6G नेटवर्क को चलाने के लिए और भी तेज़ और ऊर्जा-कुशल सेमीकंडक्टर चिप्स की ज़रूरत होगी। यह न केवल हमारे इंटरनेट की गति को कई गुना बढ़ा देगा, बल्कि यह हमें एक ऐसे भविष्य से जोड़ेगा जहाँ हर डिवाइस एक-दूसरे से जुड़ा होगा और real-time में संचार करेगा। मुझे लगता है कि 6G के साथ, IoT और AI का असली पोटेंशियल सामने आएगा, और यह सब संभव होगा नई पीढ़ी के सेमीकंडक्टर की बदौलत। ये चिप्स हमारे कनेक्टिविटी अनुभव को एक नए स्तर पर ले जाएंगे, जिससे हम ऐसे एप्लिकेशन और सेवाएँ देख पाएंगे जिनकी हमने आज तक कल्पना भी नहीं की है।
भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम: एक विस्तृत नज़रिया
आज मैं आपको भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के बारे में कुछ ऐसी बातें बताना चाहता हूँ जो शायद आपको न पता हों। मुझे लगता है कि यह सिर्फ सरकार की नीतियाँ नहीं हैं, बल्कि हमारे देश के युवाओं का टैलेंट और उनका उत्साह भी है जो हमें इस दिशा में आगे बढ़ा रहा है। पहले हम इस क्षेत्र में बहुत पीछे थे, लेकिन अब ‘सेमीकॉन इंडिया’ जैसे कार्यक्रमों ने एक नई उम्मीद जगाई है। मेरा अनुभव कहता है कि जब देश में ही चिप्स बनेंगी, तो न केवल हमारी अर्थव्यवस्था मज़बूत होगी, बल्कि हमारे युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर भी खुलेंगे।
डिज़ाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक
भारत हमेशा से चिप डिज़ाइन के क्षेत्र में मज़बूत रहा है, और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के डिज़ाइन सेंटर हमारे देश में हैं। लेकिन अब हम फैब्रिकेशन (यानी चिप बनाने) और ATMP/OSAT (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) में भी अपना इकोसिस्टम बना रहे हैं। मुझे यह जानकर बहुत खुशी होती है कि गुजरात के सानंद में CG-Semi की उन्नत OSAT सुविधा तेज़ी से आगे बढ़ रही है, जहाँ से पहली ‘मेड इन इंडिया’ चिप के रोल-आउट की बात सरकार कर रही है। यह सिर्फ एक शुरुआत है, और आने वाले समय में पैकेज्ड चिप्स का उत्पादन भारत में होगा, और नई फाउंड्री/फैब यूनिट्स भी बनेंगी। यह सिर्फ चिप्स बनाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा पूरा माहौल बनाना है जहाँ इनोवेशन और उत्पादन साथ-साथ बढ़ें।
प्रमुख चुनौतियाँ और समाधान
जैसा कि मैंने पहले भी बताया, सेमीकंडक्टर निर्माण एक बेहद पूंजी-गहन और तकनीकी रूप से जटिल क्षेत्र है। मुझे लगता है कि सबसे बड़ी चुनौती है बुनियादी ढांचे की कमी और कुशल प्रतिभाओं का अभाव। चिप फैब्स को चलाने के लिए अत्यधिक कुशल इंजीनियरों और तकनीशियनों की ज़रूरत होती है, और हमें इस स्किल गैप को भरना होगा। इसके लिए ‘चिप्स टू स्टार्टअप (C2S)’ जैसे कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण हैं, जो उच्च गुणवत्ता वाले इंजीनियरों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। साथ ही, हमें वैश्विक साझेदारियाँ और निवेश भी आकर्षित करना होगा, क्योंकि यह एक वैश्विक उद्योग है जहाँ सहयोग बहुत ज़रूरी है। मेरा मानना है कि अगर हम इन चुनौतियों का सामना सही रणनीति के साथ करेंगे, तो भारत जल्द ही एक वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बन जाएगा।
| सामग्री | मुख्य गुण | प्रमुख उपयोग |
|---|---|---|
| सिलिकॉन (Silicon) | उच्च शुद्धता, कम लागत, विस्तृत तापमान सीमा | माइक्रोप्रोसेसर, मेमोरी चिप्स, सोलर पैनल, डायोड, ट्रांजिस्टर |
| जर्मेनियम (Germanium) | सिलिकॉन से पहले व्यापक उपयोग, उष्ण अतिसंवेदनशीलता के कारण कम उपयोग | उच्च गति उपकरण (सिलिकॉन के साथ मिश्र धातु में) |
| गैलियम आर्सेनाइड (Gallium Arsenide – GaAs) | उच्च गति, ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक गुण | लेज़र डायोड, सोलर सेल, माइक्रोवेव-फ्रीक्वेंसी ICs |
| गैलियम नाइट्राइड (Gallium Nitride – GaN) | उच्च वोल्टेज, उच्च तापमान, उच्च ऊर्जा दक्षता | पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, 5G बेस स्टेशन, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर |
| सिलिकॉन कार्बाइड (Silicon Carbide – SiC) | असाधारण कठोरता, उच्च तापमान सहनशीलता, उच्च थर्मल कंडक्टिविटी | इलेक्ट्रिक वाहन पावर इन्वर्टर, औद्योगिक मोटर ड्राइव |
| ग्राफीन (Graphene) | अत्यंत पतला, उच्च चालकता, लचीला, मजबूत | लचीले इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, सुपरकैपेसिटर (अनुसंधान के अधीन) |
| टंगस्टन डाइसल्फाइड (Tungsten Disulfide – WS2) | 2D सामग्री, लचीले इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए टिकाऊ | पहनने योग्य स्वास्थ्य निगरानी सेंसर, लचीले डिस्प्ले (अनुसंधान के अधीन) |
आजकल सेमीकंडक्टर की दुनिया में जो तेजी से बदलाव आ रहे हैं, वो देखकर सच में दिल खुश हो जाता है! हमने देखा कि कैसे सिलिकॉन से लेकर GaN, SiC और 2D मटेरियल्स तक, ये सभी मिलकर हमारी डिजिटल दुनिया को एक नई दिशा दे रहे हैं। भारत भी अब इस रेस में पीछे नहीं है, बल्कि अपनी ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना से इस क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा रहा है। मुझे पूरा यकीन है कि आने वाले समय में ये छोटी-छोटी चिप्स हमारे जीवन को और भी स्मार्ट, तेज और सुविधाजनक बनाएंगी। यह सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि एक बेहतर भविष्य की नींव है, जिसमें हमारा देश एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभरेगा।
글을 마치며
तो दोस्तों, सेमीकंडक्टर की ये अद्भुत दुनिया हमें दिखाती है कि कैसे छोटे-से-छोटे इनोवेशन भी हमारी ज़िंदगी को पूरी तरह बदल सकते हैं। रेत से चिप बनने तक का सफर, और फिर उन चिप्स का हमारे फोन से लेकर बड़ी-बड़ी मशीनों तक में इस्तेमाल होना, किसी जादू से कम नहीं है। मुझे तो ये सब देखकर हमेशा एक अलग ही ऊर्जा मिलती है कि हमारा देश भी इस ग्लोबल रेस में अपनी पहचान बना रहा है। ये हमारे लिए सिर्फ तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि गर्व और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। आने वाले समय में ये ‘डिजिटल हीरे’ हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेंगे और हमें एक तकनीकी महाशक्ति के रूप में स्थापित करेंगे।
मुझे यकीन है कि ये जानकारी आपको सेमीकंडक्टर की गहराई को समझने में मदद करेगी और आपको भी इस रोमांचक दुनिया का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करेगी। हमारे देश में जिस तरह से नए-नए प्रोजेक्ट्स आ रहे हैं और युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, मुझे लगता है कि हम जल्द ही इस क्षेत्र में दुनिया को रास्ता दिखाएंगे।,
알아두면 쓸모 있는 정보
1. सेमीकंडक्टर आधुनिक जीवन का आधार: हमारे स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी, कार और यहां तक कि स्मार्ट होम डिवाइस भी सेमीकंडक्टर चिप्स के बिना काम नहीं कर सकते। ये हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक अविभाज्य हिस्सा बन गए हैं।
2. सिलिकॉन सबसे आम सामग्री: सिलिकॉन (Silicon) आज भी सेमीकंडक्टर उद्योग का सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला कच्चा माल है, जो इसकी कम लागत और बेहतरीन चालकता के गुणों के कारण है।
3. नई सामग्रियों का उदय: गैलियम नाइट्राइड (GaN) और सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) जैसी “वाइड बैंडगैप” सामग्रियां अब उच्च गति, उच्च तापमान और ऊर्जा-कुशल अनुप्रयोगों के लिए गेम चेंजर साबित हो रही हैं, जैसे 5G और इलेक्ट्रिक वाहन।
4. भारत का आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य: ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ जैसी सरकारी पहलों और भारी निवेश के साथ, भारत 2030 तक 100-120 बिलियन डॉलर का सेमीकंडक्टर बाजार बनने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख भूमिका निभाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।,
5. भविष्य की तकनीकें सेमीकंडक्टर पर निर्भर: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और 6G जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकें सेमीकंडक्टर के और भी उन्नत और विशिष्ट रूपों पर निर्भर करेंगी, जो भविष्य में अभूतपूर्व नवाचार लाएंगे।
중요 사항 정리
इस पूरे ब्लॉग पोस्ट से हमने यह समझा कि सेमीकंडक्टर चिप्स हमारी आधुनिक दुनिया के ‘डिजिटल हीरे’ हैं, जिनके बिना आज की तकनीक की कल्पना करना भी मुश्किल है। हमने सिलिकॉन से लेकर नई पीढ़ी के GaN, SiC और ग्राफीन जैसे 2D मटेरियल्स तक की यात्रा को देखा, जिन्होंने चिप्स को तेज़ और अधिक कुशल बनाया है। यह भी जानना बेहद उत्साहजनक है कि भारत अब इस क्षेत्र में न केवल डिज़ाइन बल्कि फैब्रिकेशन और पैकेजिंग में भी आत्मनिर्भर बनने की ओर तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।,, सरकारी प्रोत्साहन, जैसे ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ और ‘PLI योजना’, इस प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जबकि कुशल प्रतिभाओं का विकास और मजबूत बुनियादी ढांचा अभी भी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।, मुझे लगता है कि जिस तरह से भारत इन चुनौतियों का सामना कर रहा है और 2030 तक 120 अरब डॉलर के बाजार का लक्ष्य लेकर चल रहा है, उससे यह स्पष्ट है कि हम जल्द ही वैश्विक सेमीकंडक्टर परिदृश्य में एक मजबूत शक्ति बनेंगे।, ये चिप्स हमारे स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहनों और AI जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को शक्ति प्रदान करते रहेंगे, और मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले दशक में भारत एक ‘सेमीकंडक्टर पावरहाउस’ के रूप में उभरेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖
प्र: आजकल सेमीकंडक्टर चिप्स बनाने में कौन सी नई और उन्नत सामग्रियाँ सबसे ज़्यादा चर्चा में हैं और क्यों?
उ: दोस्तों, सच कहूँ तो सेमीकंडक्टर की दुनिया में हर दिन कुछ न कुछ नया हो रहा है! लेकिन अगर हम आजकल की सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाली और गेम-चेंजिंग सामग्रियों की बात करें, तो ग्राफीन (Graphene) जैसे 2D मटेरियल्स और गैलियम नाइट्राइड (Gallium Nitride – GaN) का नाम सबसे ऊपर आता है। मेरी रिसर्च और अनुभव के हिसाब से, ये सामग्रियां कमाल की हैं क्योंकि ये हमें पहले से भी ज़्यादा छोटे, तेज़ और ऊर्जा-कुशल चिप्स बनाने में मदद कर रही हैं।ग्राफीन, जैसा कि आप जानते हैं, कार्बन का एक अद्भुत 2D रूप है जो सिर्फ एक परमाणु जितना मोटा होता है। इसकी खासियत ये है कि ये बिजली का संचालन बहुत तेज़ी से करता है और बेहद मजबूत भी होता है। सोचिए, एक ऐसी सामग्री जो इतनी पतली होने के बावजूद इतनी शक्तिशाली हो!
यह हमें ऐसे अल्ट्रा-फास्ट चिप्स बनाने की दिशा में ले जा रहा है, जो आज हमारी कल्पना से भी परे हैं।वहीं, गैलियम नाइट्राइड (GaN) एक वाइड-बैंडगैप सेमीकंडक्टर है, जो सिलिकॉन के मुकाबले ज़्यादा तापमान और उच्च वोल्टेज पर काम कर सकता है। इसका मतलब है कि इससे बने चिप्स ज़्यादा पावरफुल होते हैं, कम गर्मी पैदा करते हैं, और ज़्यादा एफिशिएंट होते हैं। खास तौर पर 5G टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स में इसकी बहुत डिमांड है। मैंने खुद देखा है कि कैसे GaN-आधारित चार्जर छोटे और ज़्यादा कुशल होते जा रहे हैं। ये सामग्रियाँ सिर्फ नई नहीं हैं, बल्कि ये सेमीकंडक्टर उद्योग में एक क्रांति ला रही हैं, जिससे हमारे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और भी स्मार्ट और शक्तिशाली बन रहे हैं।
प्र: भारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत सेमीकंडक्टर निर्माण में अपनी जगह कैसे बना रहा है और इसका भविष्य क्या है?
उ: यह सवाल सुनकर मुझे हमेशा गर्व महसूस होता है! ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत, भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण में अपनी जगह बनाने के लिए वाकई कमर कस ली है। पहले हम चिप्स के लिए दूसरे देशों पर बहुत ज़्यादा निर्भर थे, खासकर ताइवान, अमेरिका और चीन जैसे देशों पर। लेकिन अब, भारत सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) जैसे शानदार पहल की शुरुआत की है, जिसके तहत 76,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया गया है।मेरा मानना है कि यह एक मास्टरस्ट्रोक है, क्योंकि इसका लक्ष्य सिर्फ चिप बनाना नहीं, बल्कि डिज़ाइन से लेकर फैब्रिकेशन (निर्माण) और पैकेजिंग तक का पूरा इकोसिस्टम भारत में तैयार करना है। हाल ही में, मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि सरकार ने ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश में चार और सेमीकंडक्टर निर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें हजारों करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। इसके अलावा, सेमीकॉन इंडिया 2025 जैसे सम्मेलन भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।आप यह जानकर हैरान होंगे कि भारत में चिप डिजाइनिंग का लगभग 20% काम पहले से ही होता है। अब ‘विक्रम 32-बिट’ जैसे ‘मेड इन इंडिया’ माइक्रोप्रोसेसर भी बनने लगे हैं, जो देश के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। मेरा व्यक्तिगत अनुभव कहता है कि यह सिर्फ आयात पर निर्भरता कम नहीं करेगा, बल्कि हमें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के झटकों से भी बचाएगा और लाखों युवाओं के लिए रोज़गार के नए रास्ते खोलेगा। 2030 तक भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 100-110 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, और हम इसमें एक बड़ा हिस्सा लेने के लिए पूरी तरह तैयार हैं!
यह सिर्फ शुरुआत है, दोस्तों, भारत का सेमीकंडक्टर भविष्य बहुत उज्ज्वल है!
प्र: ये छोटे सेमीकंडक्टर चिप्स और उनसे बनी सामग्री हमारे दैनिक जीवन और भविष्य की तकनीकों, जैसे AI और 5G, को कैसे प्रभावित करती हैं?
उ: अगर मुझसे कोई पूछे कि आधुनिक जीवन में सबसे ज़रूरी क्या है, तो मेरा जवाब होगा – सेमीकंडक्टर चिप्स! सच कहूँ तो, हम सब इनकी वजह से ही इतनी आरामदायक और कनेक्टेड दुनिया में जी पा रहे हैं। मेरी अपनी ज़िंदगी में, चाहे मेरा स्मार्टफोन हो, लैपटॉप की स्पीड हो, या घर के स्मार्ट उपकरण हों, ये सब इन्हीं छोटे चिप्स की बदौलत ही काम करते हैं।ये चिप्स हमारे दैनिक जीवन की रीढ़ हैं। स्मार्टफोन से लेकर लैपटॉप, टीवी, स्मार्टवॉच और यहां तक कि IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) डिवाइस भी इन्हीं पर चलते हैं। कल्पना कीजिए कि अगर ये न हों, तो हमारी दुनिया कितनी धीमी और मुश्किल हो जाएगी!
इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) में बैटरी मैनेजमेंट, सेंसर और नेविगेशन के लिए भी ये बेहद ज़रूरी हैं।भविष्य की बात करें, तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और 5G जैसी क्रांतिकारी तकनीकों को आकार देने में सेमीकंडक्टर्स की भूमिका बिल्कुल केंद्रीय है। AI के लिए हाई-स्पीड डेटा प्रोसेसिंग और भारी-भरकम कंप्यूटिंग पावर चाहिए होती है, जो सिर्फ उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स ही दे सकते हैं। 5G नेटवर्क, जो हमें अल्ट्रा-फास्ट इंटरनेट कनेक्टिविटी देता है, वह भी इन चिप्स के बिना असंभव है, क्योंकि इन्हें डेटा को तेज़ी से प्रोसेस करने और ट्रांसमिट करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।मैंने देखा है कि कैसे ये चिप्स रक्षा क्षेत्र में मिसाइल गाइडेंस सिस्टम और राडार से लेकर मेडिकल उपकरणों जैसे MRI और CT-स्कैन मशीनों तक, हर जगह क्रांति ला रहे हैं। ये केवल टेक्नोलॉजी के बारे में नहीं हैं; ये हमारे जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने, नई खोजों को संभव बनाने और एक स्मार्टर, अधिक कनेक्टेड भविष्य बनाने के बारे में हैं। मुझे तो लगता है कि ये छोटे जादूगर ही हैं जो हमारी आने वाली दुनिया को सचमुच ‘स्मार्ट’ बनाएंगे!






